विकास के विभिन्न क्षेत्रों में गृह विज्ञान का योगदान

 

विकास के विभिन्न क्षेत्रों में गृह विज्ञान का योगदान

Hello Friends,
राष्ट्र के विकास में गृह विज्ञान के योगदान को किसी भी प्रकार से नकारा नहीं जा सकता और ना ही इसे कम करके आंका जा सकता है। आज इस लेख में हम विकास के विभिन्न क्षेत्रों में गृह विज्ञान का योगदान या राष्ट्र के विकास में गृह विज्ञान का योगदान क्या है पर विस्तृत चर्चा करेंगे। तो आइए शुरू करते हैं।

 

गृह विज्ञान एवं राष्ट्रीय विकास

किसी राष्ट्र के विकास या प्रगति का अनुमान वहां की जनता के सर्वांगीण विकास, रहन-सहन, शिक्षा, आर्थिक स्थिति, सामाजिक स्थिति, स्वास्थ्य, इत्यादि को देखकर लगाया जा सकता है। जिस प्रकार विभिन्न देशों जैसे – जापान के औद्योगिक विकास में वहां के उद्योगों और रूस के तकनीकी विकास में वहां की तकनीकी संस्थाओं का योगदान है। उसी प्रकार हम यह कह सकते हैं कि भारत के विकास में प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से शिक्षण संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान है।
यदि भारतीयों का जीवन स्तर सुधरा है तो इसका श्रेय कुछ हद तक गृह विज्ञान शिक्षण को भी है। कुशल गृह प्रबंध द्वारा घर को सुविधा पूर्ण तथा पारिवारिक जीवन को सुखप्रद बनाना गृह विज्ञान शिक्षण का प्रमुख उद्देश्य है। भारत के परिवारों में गृह विज्ञान शिक्षण द्वारा आज पहले की तुलना में काफी सुधार आया है विभिन्न क्षेत्रों के विकास में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गृह विज्ञान शिक्षण का प्रभाव पड़ा, जो राष्ट्रीय विकास को इंगित करता है।

 

विकास के विभिन्न क्षेत्रों में गृह विज्ञान का योगदान
या
राष्ट्र के विकास में गृह विज्ञान का योगदान

राष्ट्र के विकास में गृह विज्ञान का योगदान निम्नलिखित है –

(1) रहन-सहन या जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में

  • रहन-सहन या जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में गृह विज्ञान शिक्षण का महत्वपूर्ण योगदान है।
  • गृह विज्ञान के ज्ञान द्वारा गृहिणी परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं को भली-भांति समझती है तथा उनकी संतुष्टि करती है।
  • कम बजट में भी घर को सुख-सुविधा पूर्ण बनाती है।
  • समय, शक्ति बचत के उपकरणों का प्रयोग कर कम समय एवं शक्ति व्यय करके अधिक से अधिक कार्यों को पूरा करती है।
  • पारिवारिक सदस्यों का सहयोग प्राप्त कर घर को स्वर्ग जैसा बनाती है जहां परिवार के सदस्य सुखपूर्वक रहते हैं।
  • घर में अपनी बुद्धिमानी का प्रयोग कर धन की बचत करती है तथा उस धन को ऐसे जगहों पर विनियोग करती है जहां अधिक लाभ प्राप्त हो।
  • परिणाम स्वरूप परिवार में आय होने लगता है और उनका जीवन स्तर ऊंचा उठता है।
  • इस प्रकार प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से गृह विज्ञान शिक्षण परिवार, समाज, एवं राष्ट्र के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

 

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(2) पोषण के क्षेत्र में

  • पोषण के क्षेत्र में गृह विज्ञान की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण है। गृह विज्ञान का महत्वपूर्ण भाग आहार एवं पोषण संबंधी ज्ञान है।
  • गृह विज्ञान शिक्षण द्वारा लड़कियां/महिलाएं परिवार का पोषण स्तर सुधारने में सहायता प्रदान करतीं हैं
  • कम खर्च करके हर आयु वर्ग के सदस्यों के लिए आहार नियोजन करतीं है।
  • भोजन पकाने की नवीन एवं उन्नत विधियों का प्रयोग कर पोषक तत्व को नष्ट होने से बचा कर स्वादिष्ट, पौष्टिक एवं तृप्ति दायक भोजन तैयार करतीं हैं।
  • रोग की अवस्था में व्यक्ति को किस प्रकार का आहार दिया जाएगा? किस रोग की अवस्था में कौन से भोजन पदार्थ वर्जित होंगे, कितनी मात्रा दी जाएगी इन सभी बातों की जानकारी गृह विज्ञान शिक्षण द्वारा दी जाती है।
  • गृह विज्ञान शिक्षण द्वारा छात्राएं/महिलाएं अपने-अपने घरों में उसका प्रयोग करतीं है तब निश्चित ही परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  • जब व्यक्ति स्वस्थ रहेगा तो निश्चित ही परिवार, समाज एवं राष्ट्र का उत्थान होगा।

 

(3) स्वास्थ्य के क्षेत्र में

  • गृह विज्ञान शिक्षण द्वारा लड़कियां या महिलाएं अपने तथा अपने परिवार के स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग रहती हैं।
  • वे अपने ज्ञान व कार्य कौशल से घर के सदस्यों को स्वास्थ्यवर्धक, संतुष्टिदायक, पौष्टिक व संतुलित भोजन उपलब्ध करवाती है।
  • भोजन को स्वच्छ तरीके से पकाकर सुंदर ढंग से परोसती है।
  • घर को स्वच्छ रखती है।
  • सभी को मौसम के अनुकूल स्वच्छ वस्त्र उपलब्ध करवाती है।
  • शिशु पालन की शिक्षा प्राप्त करके स्वच्छतापूर्ण वातावरण में बच्चों को पालना, समय पर टीके लगवाना, उचित पोषण प्रदान करना, आदि सभी कार्य कुशलतापूर्वक कर सकती है।
  • अस्वस्थ होने पर डॉक्टर की सहायता से उचित उपचार तथा स्वयं उचित देखरेख, परिचर्या द्वारा उन्हें जल्दी ही रोगमुक्त करने में सहायता करती है जिससे बच्चा हष्ट-पुष्ट और पूर्ण स्वस्थ रहता है।
  • वृद्धों को सम्मान पूर्वक जीवन व्यतीत करने में सहयोग देती है।
  • यदि घर में गर्भवती एवं धात्री माता है तो उनके स्वास्थ्य एवं पोषण का पूरा ध्यान रखती है।
  • किसी सदस्य के बीमार होने या दुर्घटना होने पर प्राथमिक उपचार करती है और आवश्यक होने पर चिकित्सक के पास ले जाती है।
  • इस प्रकार गृह विज्ञान के ज्ञान द्वारा लड़कियां या महिलाएं अपने परिवार वालों को स्वस्थ रखने में अमूल्य भूमिका निभाती है।
  • गृह विज्ञान प्रसार शिक्षा द्वारा यह सभी बातें दूसरों को भी बताती है यही कारण है कि आज मातृ-शिशु मृत्यु दर में बहुत कमी आई है।

 

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(4) रोजगार के क्षेत्र में

  • गृह विज्ञान विषय में स्नातक, डिप्लोमा तथा स्नातकोत्तर लड़कियां गृह विज्ञान शिक्षा क्षेत्र में अंदर तथा बाहर भी विभिन्न व्यवसाय तथा रोजगार प्राप्त कर सकती हैं।
  • गृह विज्ञान शिक्षण क्षेत्र के अंदर के रोजगार से आशय है कि जिन स्कूलों, कॉलेजों अथवा प्रशिक्षण महाविद्यालयों में गृह विज्ञान की पढ़ाई होती है अथवा वे गैर-सरकारी या सरकारी संस्थाएं जो गृह विज्ञान शिक्षण से जुड़ी है वहां पर शिक्षिका अथवा संचालिका के रूप में भी कार्य कर सकती है।
  • गृह विज्ञान शिक्षण क्षेत्र से बाहर रोजगार से आशय है – पशुपालन, कृषि अनुसंधान, डेयरी, प्रसार शिक्षा निदेशालय, औद्योगिक क्षेत्र तथा अन्य शिक्षण संस्थाओं में भी रोजगार प्राप्त कर सकती है।

 

(5) प्रौढ़ शिक्षा तथा बाल शिक्षा के क्षेत्र में

  • प्रौढ़ शिक्षा तथा बाल शिक्षा के क्षेत्र में भी गृह विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका है। बच्चों एवं प्रौढ़ों को शिक्षित करने में गृह विज्ञानी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
  • वे बच्चे जो स्कूल जाना छोड़ चुके हैं। भेड़-बकरियां चराते हैं। उन्हें पढ़ाती है।
  • प्रौढ़ों को भी खाली समय में जाकर पढ़ाती है।
  • प्रौढ़ों के लिए सरकार द्वारा रात्रि पाठशाला की व्यवस्था की गई है। पाठ शालाओं में यह उन्हें साक्षर बनना सिखाती है जिससे उन्हें कोई ठग ना सके।
  • इस तरह गृह विज्ञान का ज्ञान प्राप्त कर लड़कियां व महिलाएं प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से राष्ट्र के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

 

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(6) परिवार-कल्याण एवं जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में

  • गृह विज्ञान शिक्षण परिवार कल्याण के अंतर्गत ‘छोटा परिवार, सुखी परिवार’ का संदेश देती है।
  • गृह विज्ञान विषय के अंतर्गत जनसंख्या शिक्षा भी दी जाती है।
  • गृह विज्ञान का ज्ञान प्राप्त कर लड़कियां अपने परिवार को सीमित रखकर, अन्य लोगों के समक्ष आदर्श उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं।
  • परिवार-कल्याण एवं जनसंख्या नियंत्रण से संबंधित विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों से जोड़कर भी गृह विज्ञानी राष्ट्रीय विकास में सहयोग प्रदान कर रही है।

 

(7) स्त्री-शिक्षा के क्षेत्र में

  • देश की आधी आबादी महिलाओं की है। हमारे देश में आज भी स्त्री शिक्षा बहुत पिछड़ी है। अपेक्षाकृत पुरुषों की तुलना स्त्रियों के बीच साक्षरता बहुत कम है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में। स्त्रियों के पिछड़ेपन का प्रभाव परिवारों पर भी पड़ता है।
  • गृह विज्ञान शिक्षा का उद्देश्य स्त्रियों को शिक्षित कर, रोजगार के नए अवसर प्रदान कर उन्हें आत्म-निर्भर बनाना एवं उनका सर्वांगीण विकास करना है।
  • सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों के साथ मिलकर गृह विज्ञानी स्त्री-शिक्षा के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान प्रदान कर रहीं हैं। और राष्ट्रीय विकास में अपना सहयोग दे रहीं हैं।
  • अगर महिलाएं सुशिक्षित, समझदार, कर्तव्यनिष्ठ, मितव्ययी तथा दूरदर्शी होंगी तो निश्चित ही राष्ट्र का विकास होगा।

 

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